तिब्बत में जीभ बाहर निकालना सम्मान और मैत्रीपूर्ण स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
ऐतिहासिक उत्पत्ति:
- 👑 यह 9वीं शताब्दी के राजा लैंग डार्मा से जुड़ा है, जिसकी जीभ काली बताई जाती थी
- 👺 लोग यह दिखाने के लिए जीभ निकालते थे कि वे उस क्रूर राजा के पुनर्जन्म नहीं हैं
शांति का संकेत:
- 🤝 यह दर्शाता है कि व्यक्ति के मन में मेहमान के प्रति कोई बुरे विचार नहीं हैं
- 🏔️ अक्सर इसे छाती के सामने हथेलियों को जोड़कर किया जाता है